Wednesday, November 18, 2009

गैरी क्रिस्टन के सुझाव में बुराई क्या है भाई

नीरज नैयर
ुकुछ वक्त पहले भारतीय क्रिकेट टीम के कोच गेरी क्रिस्टन ने एक सुझाव दिया था जिसे लेकर देश में काफी बवाल मचा, कुछ भूतपूर्व खिलाड़ियों ने तो उनके निष्कासन तक की मांग कर डाली. चारों तरफ से प्रखर हो रहे विरोध के स्वर को देखते हुए गैरी को अंतत: वही रास्ता अपनाना पड़ा जो हमारे नेता वर्षों से अपनाते आए हैं, यानी मेरी बातों का गलत अर्थ निकाला गया. तब कहीं जाकर मामला रफा-दफा हो सका. गैरी क्रिस्टन मूलत दक्षिण अफ्रीका से हैं, इसलिए उनके ख्यालात और भारतीयों के ख्यालात एक जैसे नहीं हो सकते. लेकिन उनके सुझाव एक कोच के तौर पर थे और वैसे देखा जाए तो उसमें कुछ गलत भी नहीं था. गैरी के सुझावों की बारिकियों और उनमें छिपे वैज्ञानिक तथ्यों को जाने-समझे बिना ही इतना बड़ा बवंडर खड़ा कर दिया गया. भारतीय कोच ने सेक्स को जीत का मंत्र बताते हुए खिलाड़ियों को इसकी सलाह दी थी.

उनका तर्क था कि यौन संबंध से टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिससे अक्रामकता, और प्रतिस्पध्र्दा की भावना जार्गत होती है. मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुधारने के लिए बेहद जरूरी है कि वो लंबे समय तक सेक्स से दूर हरगिज न रहें, ऐसी स्थिति में आक्रामकता के स्तर में गिरावट आने की संभावना यादा रहती है. गैरी ने यहां तक कहा था कि अगर खिलाड़ियों के पास संभोग के लिए साथी नहीं है तो वो उसका स्मरण करके हस्तमैथुन का सहारा ले सकते हैं.

भारतीय परिवेश में रहकर सोचा जाए तो खुलेआम सेक्स की सलाह देना अटपटा लग सकता है लेकिन तमाम रिसर्च गैरी के सुझावों पर मुहर लगाते हैं. हाल ही में लंदन की क्वीन्स यूनिवर्सिटी द्वारा किए गये एक शोध के नतीजे कुछ ऐसी ही सलाह देते हैं, शोध के मुताबिक हफ्ते में तीन बार सुबह के वक्त किया गया संभोग सेहत के लिए बेहद लाभकारी है. इससे रक्त संचार तो बेहतर होता ही है, हार्ट अटैक और उच्च रक्तचाप का खतरा भी कम हो जाता है. साथ ही जोड़ों का दर्द, माइग्रेन और डायबिटीज जैसी बीमारियों से भी छुटकारा पाया जा सकता है. सुबह-सुबह के सेक्स से शरीर में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निर्माण काफी तेजी से होता है, यह हार्मोन हड्डियों एवं मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक की भूमिका निभाता है.

इसी तरह स्कॉटलैंड में किए गये एक शोध के अनुसार नियमित संभोग से तनाव में कमी आती है और चित्त शांत बना रहता है. कुछ वैज्ञानिकों का मत है कि सेक्स से इम्यूनोग्लॉबिन नामक प्रतिरक्षी में बढाेतरी होती है, जो सर्दी-जुकाम जैसे इन्फेक्शन को रोकने में मददगार है. नियमित संभोग का एक और सबसे बड़ा फायदा है कि यह बदन की चर्बी को घटाने का भी काम करता है, जिसकी जरूरत टीम इंडिया के कुछ खिलाड़ियों को है. लगभग आधे घंटे के सेक्स से 85 के आसपास कैलोरी जलाई जा सकता है. भले ही 85 का आंकड़ा कम दिखाई दे रहा हो मगर असल में इतना करने में ही पेच ढीले हो जाते हैं. सेक्स को एक तरह से ऐसी कसरत कहा जा सकता है जो सेहत के साथ-साथ सुख भी प्रदान करती है.

ब्रिटिश जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सेक्स से पुरुषों में प्रॉस्टेट कैंसर का खतरा कम होता है. साथ ही इससे आत्मसम्मान में वृध्दि होती है. संभोग के बाद अलग सी खुशी महसूस होती है इसलिए काफी लोग अच्छा महसूस करने के लिए भी सेक्स संबंध बनाते हैं. सेक्स का खूबसूरती से भी गहरा नाता है, इससे एस्ट्रोजन नाम का फीमेल हार्मोन अधिक मात्रा में बनता है जिसकी वजह से बाल और चेहरे पर चमक आती है. कुछ जानकार तो हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए हफ्ते में 3 से चार पर हमबिस्तर होने की सलाह देते हैं, उनके मुताबिक सेक्स से ऑक्सटॉसिन हार्मोंस स्तर बढ़ता है, जिससे आपसी संबंधों में मजबूती आती है और एक दूसरे के प्रति उदारता की भावना बढ़ती है. अब इतने सारे फायदे सेक्स के अलावा और कहां मिल सकते हैं, इसलिए गैरी क्रिस्टन ने काफी सोच-समझकर यह सुझाव दिया होगा. लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि भारत में इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है.

दरअसल पूर्व भारतीय खिलाड़ियों का एक तबका विदेशी कोच की परंपरा के हमेशा से ही खिलाफ रहा है. ग्रेग चैपल प्रकरण के बाद माना जा रहा था भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई देशी कोच को ही तवाो देगा मगर ऐसा कुछ हुआ नहीं. ऐसे में इसकी खीज गैरी के बयान जमकर निकली, गैरी क्रिस्टन को जब कोच बनाने की बात चल रही थी तब कहा जा रहा था कि एक ऐसा खिलाड़ी जो भारत के नाम से भी नफरत करता है, वह टीम को भला क्या संभालेगा. लेकिन क्रिस्टन धीरे-धीरे ही सही मगर इसका जवाब दे रहे हैं. वैसे भी हमारे देश में बिना कुछ जाने-ताने हर चीज के विरोध की एक परंपरा सी बन गई है. कुछ वक्त पहले अमेरिका के साथ परमाणु करार को लेकर काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे. लेकिन विरोध करने वालों में से आधा से यादा को विरोध के कारण का अता-पता नहीं था. कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति यदि सुझाव देता है तो पहले उसकी गहराई में जाकर पड़ताल करना जरूरी है.

टीम इंडिया के खिलाड़ियों में आक्रामकता, एकाग्रता और प्रतिस्पर्धा की कमी हमेशा से ही रही है, अक्सर देखा जाता है कि निर्णायक वक्त में हमारे खिलाडी धैर्य हो देते हैं. जबकि ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका आदि टीमें इस मामले में कहीं आगे हैं. मैच जीतने के लिए जिस आक्रामता की जरूरत होती है वह पूरी तरह से अब भी खिलाड़ियों में विकसित नहीं हो पाई हॅै. कुल मिलाकर कहा जाए तो टीम इंडिया में ढेरों खामिया हैं, जिसे दूर करने की जिम्मेदारी गैरी के कंधों पर है और वो बखूबी जानते हैं कि उसे कैसे निभाना है.

गैरी के सुझावों में नयापन कुछ भी नहीं है, ये बात सब जानते हैं, विरोध करने वाले भी. बस फर्क केवल इतना है कि पहली बार किसी ने खुलेतौर पर इसे सामने रखा. मोरल ऑफ द स्टोरी यही है कि सेक्स से जब वो सबकुछ मिल सकता है जो घंटों जिम में पसीना बहाने के बाद भी आसानी से हासिल नहीं किया जा सकता तो फिर इस सुझाव में बुराई क्या है.
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